Tuesday, September 17, 2019

गुणा का क्षेत्रफल मॉडल (Area Model of Multiplication)

गुणा
गुणा की अवधारणा की समझ बच्चे की गणितीय सोच में एक महत्वपूर्ण विकास को दर्शाता है। इस समझ के साथ बच्चे यह पहचानने लगते हैं कि समान मात्रा के समूहों को मिलाकर किस प्रकार एक पूरी मात्रा निकाली जा सकती है। प्रारंभिक कक्षाओं में गुणा की अवधारणा की मजबूत समझ ,भाग की अवधारणा और बीजगणितीय सोच के विकास की बुनियाद का काम करती है।

प्रारंभिक कक्षाओं में बच्चे समान मात्रा के समूहों को मिलाकर गुणा के अर्थ को समझने का प्रयास करते हैं। समझने के शुरूवाती दौर में गुणा करने की स्थिति का सामना करने पर बच्चे वस्तुओं को एक-एक कर गिनते हैं और परिणाम तक पहुंचते हैं। उदाहरण के लिए , बच्चे काउंटर्स या कंकड़ों का उपयोग कर चार वस्तुओं के तीन समूहों को दर्शाने की समस्या को प्रदर्शित कर सभी काउंटर्स / कंकड़ों को गिनकर वस्तुओं की कुल संख्या निकाल सकते हैं। 

अनुभव के बढ़ने के साथ-साथ बच्चे गिनती और तर्क करने की अन्य रणनीतियां का उपयोग करना सीखते हैं। इनमें प्रमुख हैं छोड़ कर गिनना , पहचाने जोड़ के तथ्यों का उपयोग करना (जैसे 6 वस्तुओं के 3 समूह के लिए : 6 में 6 जोड़ने से 12 और 6 मिलने पर 18 होता है)। आगे की अवस्थाओं में बच्चे गुणन तथ्यों की रणनीतियां सीखकर कुशलतापूर्वक उनका उपयोग करते हैं।

एक सरणी (Array) [वस्तुओं की पंक्ति और स्तंभ के रूप में व्यवस्था] गुणा का उपयोगी मॉडल प्रस्तुत करती है। सरणी में हर पंक्ति में वस्तुओं की संख्या , गुणन व्यंजक में गुणा की जाने वाली एक संख्या को निरूपित करती है जबकि स्तंभों की संख्या दूसरी संख्या को निरूपित करती है। सरणी से वस्तुओं को हटा कर उस स्थान को इकाई या 1 x 1 के वर्ग से निरूपित करने पर गुणा का क्षेत्रफल मॉडल बन जाता है। इसके द्वारा 3 x 4 को नीचे दर्शाया गया है।
नीचे दिखायी गयी जियोजेब्रा एपलेट क्षेत्रफल मॉडल को दर्शा रही है। नीले और लाल स्लाईडर की मदद से अलग-अलग संख्याएं बनाएं और वर्गों की कुल संख्या दोनों गिनकर दोनों संख्याओं के गुणनफल निकालें।

Multiplication 
The development of multiplication concepts represents significant growth in students’ mathematical thinking. With an understanding of multiplication, students recognize how groups of equal size can be combined to form a whole quantity. Developing a strong understanding of multiplication concepts in the early classes builds a foundation for comprehending division concepts and algebraic thinking.

In the primary grades, students explore the meaning of multiplication by combining groups of equal size. Initially, students count objects one by one to determine the product in a multiplication situation. For example, students might use counters/pebbles to represent a problem involving three groups of four, and then count each counter/pebble to determine the total number.
With experience, students learn to use more sophisticated counting and reasoning strategies, such as using skip counting and using known addition facts (e.g., for 3 groups of 6: 6 plus 6 is 12, and 6 more is 18). Later, students develop strategies for learning basic multiplication facts and use these facts to perform multiplication computations efficiently.

An array (an arrangement of objects in rows and columns) provides a useful model for multiplication. In an array, the number of items in each row represents one of the factors in the multiplication expression, while the number of columns represents the other factor. Replacing objects in an array by unit or 1 × 1 squares introduces the area model of multiplication. This is illustrated below for 3 × 4.
The GeoGebra applet below shows the area model of multiplication. Use the blue and red sliders to create different numbers and count the total number of squares to get the result of the multiplication of two numbers.

Monday, September 16, 2019

संख्या रेखा पर घटाना (Subtraction on Number Line)

इस पोस्ट के माध्यम से संख्या रेखा पर पूर्णांक संख्याओं के घटाने की प्रक्रिया को दर्शाने का प्रयास किया गया है। संबंधित मुख्य अवधारणाएं इस प्रकार हैं :
  • संख्या 0 , 1 , -1 , 2 , -2 , 3 , -3 , ………… का संग्रह पूर्णांक कहलाता है।
  • संख्या +1 , + 2 , + 3 , ………… धनात्मक पूर्णांक कहे जाते हैं।
  • संख्या -1 , -2 , -3 , ………….. ऋणात्मक पूर्णांक कहे जाते हैं।
  • संख्या 0 , +1 , +2 , +3 , ………….. ऋणेत्तर (non-negative) पूर्णांक कहलाते हैं।
  • पूर्णांकों को सरल रेखा पर निम्नलिखित प्रकार से निरूपित किया जाता है ।
  • दो पूर्णांक जिनका योग शून्य हो , एक – दूसरे के योज्य प्रतिलोम कहलाते हैं। ये एक दूसरे के ऋणात्मक भी कहलाते हैं।
  • किसी पूर्णांक का योज्य प्रतिलोम उस पूर्णांक का चिन्ह बदल कर प्राप्त किया जाता है।
  • एक दिए हुए पूर्णांक में से किसी पूर्णांक को घटाने के लिए , हम दिए हुए पूर्णांक में से उस पूर्णांक का योज्य प्रतिलोम जोड़ देते हैं।
This post deals with the subtraction of integers on the number line. The related concepts are as follows :
  • The collection of numbers 0 , 1 , -1 , 2 , -2 , 3 , -3 , ………… is called integers.
  • The numbers +1 , + 2 , + 3 , ………… are referred to as positive integers.
  • The numbers - 1 , - 2 , - 3 , ………….. are referred to as negative integers.
  • The numbers 0 , +1 , +2 , +3 , ………….. are referred to as non-negative integers.
  • The integers are represented on the number line as follows :
  • Two integers whose sum is zero are called additive inverses of each other. They are also called the negatives of each other.
  • Additive inverse of an integer is obtained by changing the sign of the integer.
  • To subtract an integer from a given number, we add the additive inverse of the integer to the given integer.

Sunday, September 15, 2019

संख्या रेखा पर जोड़ (Addition on Number Line)

आपने कई प्राथमिक कक्षाओं में संख्या रेखा को ब्लैकबोर्ड पर बना देखा होगा , कई बच्चे अपने बैठने की जगह पर ही इसे बनाकर रखते हैं। आज शिक्षकों के पास गणित के प्रतिरूपण (modeling) के कई विकल्प हैं , फिर भी संख्या रेखा एक महत्वपूर्ण और उपयोगी गणितीय उपकरण है। जहाँ अन्य सामग्रियां जैसे कंकड़ , तीलियां , क्यूब आदि संख्याओं को दर्शाते हुए सीखने में मदद करते हैं , वहीं संख्या रेखा बच्चों के लिए संख्याओं के बीच के संबंधों को समझने का एक अलग नजरिया प्रस्तुत करती है। प्रारंभिक कक्षओं में संख्या रेखा के उपयोग से अवधारणाओं को समझना बच्चों के लिए चुनौतीपूर्ण होता है , फिर भी इसका उपयोग करना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह आगे के कौशलों जैसे ऋणात्मक संख्याएं , दशमलव , भिन्न , ग्राफ आदि सीखने में मदद करती है जो उपर लिखी अन्य सामग्रियों की मदद से सीखी नहीं जा सकती हैं। संख्या रेखा बच्चों को मूर्त से अमूर्त सोच की ओर ले जाती है , यह बच्चों में बीजगणितीय सोच विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

गणित में संख्या रेखा को एक ऐसी रेखा के रूप में परिभाषित किया जा सकता है जिस पर बराबर अंतराल में संख्याएं लिखी होती हैं। इसे प्राय: क्षैतिज (horizontal) रखा जाता है और दोनों दिशाओं में अनंत तक बढ़ाया जा सकता है।


बच्चे जब संख्या रेखा की आधारभूत अवधारणाओं (संख्याओं को पहचानना , किसी संख्या तक पहुंचना आदि) से परिचित हो जाएं तो , संख्या रेखा की मदद से जोड़ना इन अवधारणाओं की समझ को सुदृढ़ करने में मदद करता है ।

You must have seen a number line on the blackboard in early primary classrooms, many children also draw it near their sitting area. Although teachers today have many options for modeling mathematics, the number line is still an important and useful math tool. While cubes and other manipulatives support learning by representing numbers, the number line actually develops learning by giving students another look at number relationships. Early primary students may find using a number line more challenging for some concepts. However, it’s important to stick with it as number lines provide learning opportunities for later skills that can’t be replicated with cubes, such as negative numbers, decimals, and graphing. The visual support that the number line provides helps young learners grow from concrete to abstract to algebraic thinking.

In math, a number line can be defined as a straight line with numbers placed at equal intervals. A number line can be extended infinitely in any direction and is usually represented horizontally.

Another great opportunity for exploring a number line is when learning the first steps of addiction. When the students are familiar with basic concepts of the number line (identification of numbers, to reach a number on the number line, etc.), the addition using number line helps in reinforcing the concepts.

Saturday, September 14, 2019

त्रिभुज का बहिष्कोण (Exterior Angle of a Triangle)

त्रिभुज का बहिष्कोण
त्रिभुज ABC की भुजा BC को D तक बढ़ाने पर त्रिभुज का बहिष्कोण ∠ACD प्राप्त होता है।

चित्र से स्पष्ट है कि,∠3 और ∠4 रैखिक युग्म बना रहे हैं,अत: हम लिख सकते हैं :
                                           ∠3+∠4=180° …..(1)
हम जानते हैं कि त्रिभुज के तीनों अंत:कोणों का योग 180° होता है , अत:
                                   ∠1+∠2+∠3= 180° …..(2)
समीकरण (1) व (2) से
                                   ∠1+∠2+∠3= ∠3+∠4
या                                      ∠1+∠2= ∠4

परिणाम : यदि किसी त्रिभुज की एक भुजा बढ़ाई जाए , तो इस प्रकार बना बहिष्कोण दोनों अंत: विपरीत कोणों के योग के बराबर होता है। यहां यह भी स्पष्ट होता है कि किसी त्रिभुज का बहिष्कोण अपने दोनों अंत: विपरीत कोणों में से प्रत्येक से बड़ा होता है।
Exterior Angle of a Triangle
By extending the side BC of a triangle ABC , we get exterior angle ∠ACD of the triangle.
It is clear from the figure that ∠3 and ∠4 form a linear pair , so we can write that :
                                     ∠3+∠4=180° …..(1)
We know that , the sum of interior angles of a triangle is 180° , so
                              ∠1+∠2+∠3= 180° …..(2)
From equations (1) and (2)
                              ∠1+∠2+∠3= ∠3+∠4
Or                                ∠1+∠2= ∠4

Result: If we extend one side of a triangle, then the exterior angle so formed is equal to the sum of two interior opposite angles. It is clear from the above that the exterior angle of a triangle is greater than the corresponding two interior opposite angles.

Friday, September 13, 2019

त्रिभुज के अंत:कोणों का योग(Internal Angle Sum of a Triangle)

त्रिभुज के अंत:कोणों का योग
त्रिभुज ABC के अंत: कोण क्रमश: ∠1 , ∠2 और ∠3 हैं। (चित्र 1)



BC और PQ परस्पर समांतर रेखाएँ हैं और AB तथा AC तीर्यक रेखाएँ हैं।

भुजा BC के समांतर और शीर्ष A से गुजरने वाली एक रेखा PQ खींचें।



चित्र 2 से स्पष्ट है कि ∠4 और ∠2 तथा ∠3 और ∠5 एकांतर कोणों के युग्म हैं, अत: 

   

      

          ∠2 = ∠4 …. (1)
          ∠3 = ∠5 …. (2)

परन्तु , PAQ एक सरल रेखा है , अत:
      ∠4+∠1+∠5 = 180° …..(3)

समीकरण (3) में समीकरण (1) और समीकरण (2) से मान रखने पर
                  ∠1+∠2+∠3 = 180°
अत: , हम कह सकते हैं कि त्रिभुज के तीनों अंत:कोणों का योग 180° होता है।

Internal Angle Sum of a Triangle
∠1, ∠2 and ∠3 are internal angles of a triangle ABC. (Figure-1)
Draw a line PQ through point A parallel to side BC of the triangle.
Now, BC and PQ are parallel to each other,AB and AC are acting as transversals.
From figure-2, it is clear that ∠4,∠2 and ∠3,∠5 form pairs of alternate angles, so
∠2 = ∠4 …. (1)
∠3 = ∠5 …. (2)
PAQ is a straight line, so we can say that
∠4+∠1+∠5 = 180° …..(3)
By putting the values from equations (1) and (2) into equation (3), we get
∠1+∠2+∠3 = 180°
Thus, we can say that, the sum of the internal angles of a triangle is 180°.