Monday, September 30, 2019

Construction of Triangle - SAS Case

एक त्रिभुज की रचना जिसकी दो भुजाओं की लंबाई और उनके बीच का कोण दिया गया है।
हमें एक ऐसे त्रिभुज की रचना करनी है जिसकी दो भुजाओं की लंबाई और उन भुजओं के बीच का कोण दिया गया है। इस रचना के लिए हमें केवल रूलर और परकार का उपयोग करना है। हमें एक △ LMN की रचना करनी है जहां LM=3 सेमी, MN=5 सेमी और ∠LMN=60° दिया है। इस त्रिभुज की रचना नीचे दिए चरणों में की जा सकती है :

चरण 1 – दिए गए मापों से एक रफ आकृति बनाएं।

चरण 2 – 5 सेमी लंबाई का एक रेखा खंड MN खींचिए।

चरण 3 – बिन्दु M पर MN से 60° का कोण बनाते हुए एक किरण MX खींचिए। बिन्दु L इसी किरण पर स्थित है , हमें उसकी सही स्थिति ज्ञात करनी है।

चर॑ण 4 – बिन्दु M से बिन्दु L की दूरी 4 सेमी दी गयी है । अत: बिन्दु M को केन्द्र मानकर , 4 सेमी त्रिज्या लेकर किरण MX को प्रतिच्छेद करता हुआ एक चाप खींचिए।

चरण 5 – चरण 4 के चाप और किरण MX के प्रतिच्छेद बिन्दु L को अंकित कीजिए।

चरण 6 – LN को जोड़िए , इस प्रकार बना △ LMN वान्छित त्रिभुज है।

नीचे दिखायी गयी एपलेट में भुजाओं की दी गयी लंबाई और कोण के अनुसार छ: चरणों में त्रिभुज की रचना दिखाई गई है। छठवें चरण में तीन नए स्लाईडर दिखाई देते हैं जो भुजाओं की लंबाई को 1 इकाई से 8 इकाई तब व उनके बीच के कोण के मान को बदल सकते हैं। इनके अलग-अलग मान के अनुसार त्रिभुज की रचना देखी जा सकती है। 

Construction of a triangle whose length of two sides and angle between them is given
We need to construct a triangle whose length of two sides and the angle between them is given. We will be using ruler and compass for this construction. We are asked to construct △ LMN with LM=3 cm, MN=5 cm, and ∠LMN=60°.The construction can be done in the following steps :

Step 1 – Draw a rough sketch with the given lengths and angle.

Step 2 – Draw a line segment MN of 5 cm length.

Step 3 – At point M draw a ray MX at an angle of 60° to MN. The point L is located on this ray only. We need to find its exact location.

Step 4 - The distance of point L from point M is 4 cm. Taking M as a center and radius equal to 4 cm draw an arc to cut the ray MX.

Step 5 - Mark the point of intersection L of the arc of step 4 and ray MX.

Step 6 – Join LN, The △ LMN so obtained is the required triangle.

In the applet shown below, the construction of the triangle of given sides length and the angle between them is shown in six steps. In the sixth step, three sliders representing side lengths from 1 unit to 8 units and angle between them are shown at the bottom. These can be used to see the construction of triangles with their different values.

Sunday, September 29, 2019

Construction of a triangle whose side lengths are given(SSS Case)

एक त्रिभुज की रचना जिसकी तीनों भुजाओं की लंबाई दी गयी है।
हमें एक ऐसे त्रिभुज की रचना करनी है जिसकी तीनों भुजाओं की लंबाई दी गयी है। इस रचना के लिए हमें केवल रूलर और परकार का उपयोग करना है। एक त्रिभुज की रचना तभी संभव है जब उसकी किन्हीं भी दो भुजाओं की लंबाइयों का योग तीसरी भुजा की लंबाई से अधिक होता है। हमें एक △PQR की रचना करनी है जहां PQ=4 सेमी,QR=5 सेमी और PR=6 सेमी दिया है। हम देखते हैं कि दी गयी लंबाइयां उक्त शर्त को पूर्ण करती हैं। इस त्रिभुज की रचना नीचे दिए चरणों में की जा सकती है:

चरण 1 – भुजाओं की दी गयी मापों से एक रफ आकृति बनाएं ।

चरण 2 – 5 सेमी लंबाई का एक रेखा खंड QR खींचिए।

चरण 3 – बिन्दु Q से बिन्दु P की दूरी 4 सेमी दी गयी है । अत: बिन्दु Q को केन्द्र मानकर , 4 सेमी त्रिज्या लेकर एक चाप रेखाखंड QR के एक ओर बनाएं। बिन्दु P इसी चाप पर स्थित है , हमें उसकी सही स्थिति ज्ञात करनी है।

चर॑ण 4 - बिन्दु R से बिन्दु P की दूरी 6 सेमी दी गयी है । अत: बिन्दु R को केन्द्र मानकर , 6 सेमी त्रिज्या लेकर एक चाप उसी ओर बनाएं जिस ओर चरण 3 में बनाए थे। बिन्दु P इस चाप पर स्थित है।

चरण 5 – चरण 3 और चरण 4 से स्पष्ट है कि बिन्दु P इन चरणों में बनाए गए चापों का प्रतिच्छेद बिन्दु है। बिन्दु P को अंकित कर PQ और PR को जोडिए। इस प्रकार बना △PQR ही वान्छित त्रिभुज है।

नीचे दिखायी गयी एपलेट में त्रिभुज की भुजाओं की दी गयी लंबाई के अनुसार पांच चरणों में त्रिभुज की रचना दिखाई गई है। पांचवे चरण में तीन नए स्लाईडर दिखाई देते हैं जो भुआओं की लंबाई को 1 इकाई से 8 इकाई तब बदल सकते हैं। इनके उपयोग से अलग-अलग लंबाई की भुजाओं के त्रिभुज की रचना देखी जा सकती है। साथ ही इनकी मदद से त्रिभुज के बनने की शर्त (जो उपर लिखी गयी है) को भी घटते हुए देखा जा सकता है। उदाहरण के लिए QR=6 इकाई के लिए PR और PQ के 3 तक के मानों के लिए शर्त की पुष्टि कर सकते हैं।

Construction of a triangle whose length of three sides are given
We need to construct a triangle whose length of three sides are given. We will be using ruler and compass for this construction. We know that construction of a triangle is possible only when the sum of lengths of any two sides is more than the third side. We are asked to construct △PQR with PQ = 4 cm , QR = 5 cm and PR = 6 cm. We can see that the given lengths follow the condition of triangle construction. The construction can be done in the following steps :

Step 1 – Draw a rough sketch with the given lengths of sides.

Step 2 – Draw a line segment QR of 5 cm length.

Step 3 – The distance of point P from point Q is 4 cm. Taking Q as a center and radius equal to 4 cm draw an arc on one side of line segment QR. The point P is located on this arc only. We need to find its exact location.

Step 4 - The distance of point P from point R is 6 cm. Taking R as a center and radius equal to 6 cm draw an arc on the same side of QR as in step 3. The point P is also located on this arc.

Step 5 – From step 3 and step 4, it is clear that point P is located at the intersection of arcs of step 3 and step 4. Mark point P and join PQ and PR. The △PQR so obtained is the required triangle.

In the applet shown below, the construction of the triangle of the length of the given sides is shown in five steps. In the fifth step, three sliders representing side lengths from 1 unit to 8 units are shown at the bottom. These can be used to see the construction of triangles of different sides. At the same time, these can also be used to confirm the condition of the formation of a triangle. For example, for QR = 6 units, the values of PR and PQ up to 3 units can be tested to confirm the condition.

Saturday, September 28, 2019

Construction of a line parallel to a given line

एक दी हुई रेखा के समांतर रेखा खींचना
हमें एक रेखा l और एक बिन्दु N जो दी गयी रेखा के बाहर स्थित है , दिया गया है। बिन्दु N से होते हुए रूलर और परकार की मदद से रेखा l के समांतर एक रेखा m की रचना करनी है। रचना के चरण इस प्रकार हैं :

चरण 1 - दी गयी रेखा l खींचिए और रेखा के बाहर एक बिन्दु N लीजिए।

चरण 2 – रेखा l पर एक बिन्दु A अंकित कीजिए और बिन्दु A से बिन्दु N को मिलाइए।

चरण 3 – बिन्दु A को केन्द्र मानकर और एक सुविधाजनक त्रिज्या लेकर एक चाप बनाइए। यह चाप रेखा l को B पर और AN को C पर काटता है।

चरण 4 – बिन्दु N को केन्द्र और चरण 3 की त्रिज्या लेकर एक चाप बनाइए जो NA को बिन्दु D पर काटता है।

चरण 5 – परकार को BC लंबाई के बराबर खोलिए।

चरण 6 – D को केन्द्र मानकर परकार का खुलाव चरण 5 के बराबर रखते हुए एक चाप खींचिए जो चरण 4 के चाप को बिन्दु E पर काटता है।

चरण 7 – EN को मिलाकर रेखा m खींचिए जो दी गयी रेखा l के समांतर है।

नीचे एपलेट में उपर दिए चरण दिखाए गए हैं। एपलेट में ∠BAN = ∠ENA है , जो अंत: एकांतर कोण हैं , अत: रेखा m || रेखा l है। बिन्दु K को माउस की मदद से खींचकर रेखा l की अलग अलग परिस्थितियों में समांतर रेखा की रचना देखी जा सकती है।

Construction of a line parallel to a given line
We are given a line l and a point N not on the given line. We need to construct a line m with the help of ruler and compass through N parallel to the given line l. Following are the steps of construction:

Step 1 – Draw a line l and take a point N, not on the given line.

Step 2 – Take a point A on the given line l and join A with N.

Step 3 – Taking A as a center and a suitable radius draw an arc. This arc cuts the line l at B and AN at C.

Step 4 – Taking N as a center and with the radius of step 3, draw an arc which cuts NA at point D.

Step 5 – Open the compass equal in length to BC.

Step 6 – Taking D as a center and opening of the compass as in step 5 draw an arc which intersects the arc of step 4 at point E.

Step 7 – Join points E and N to make line m which is parallel to the line l.

The steps of constructions can be seen in the applet below. We can see that ∠BAN = ∠ENA, these are internal alternate angles. So line m || line l. Drag point K to see the construction of the parallel line in different positions of given line l.

Friday, September 27, 2019

60° कोण की रचना (Construction of 60° angle)

60° कोण की रचना
ज्यामिति में कुछ विशेष कोणों को बिना चांदे की मदद से बनाया जा सकता है। ऐसे ही 60° के कोण की रचना रूलर और परकार की मदद से करना है। रचना के चरण इस प्रकार हैं :

चरण 1 – एक रेखा n खींचिए और उस पर कोई बिन्दु A अंकित कीजिए।

चरण 2 – परकार के नुकीले सिरे को बिन्दु A पर रखकर सुविधाजनक त्रिज्या के साथ एक चाप खींचिए जो रेखा n को बिन्दु P पर काटता है।

चरण 3 – बिन्दु P को केन्द्र मानकर , चरण 2 की त्रिज्या लेकर एक चाप खींचिए । यह चाप पिछले चरण के चाप को बिन्दु Q पर काटता है।

चरण 4 – AQ को जोड़कर किरण AQ बनाइए। इस प्रकार बना ∠PAQ 60° का होगा।

नीचे दी गयी एपलेट में बिन्दु P के उपयोग से चाप की त्रिज्या को कम या ज्यादा किया जा सकता है। साथ ही बिन्दु B की मदद से रेखा n की अलग-अलग स्थिति में कोण की रचना देखी जा सकती है।

Construction of 60° angle 
There are certain angles which can be made without the help of a protractor. 60° angle is such an angle which we are going to construct with the help of ruler and compass. Following are the steps of construction:

Step 1 – Draw a line n and take a point A on it. 

Step 2 – Put the metallic point of the compass at A and with suitable radius draw an arc to cut the line n at point P. 

Step 3 – Now with P as center and radius the same as in step 2, draw another arc which cuts the arc of the previous step at point Q. 

Step 4 – Joint points A and Q to make ray AQ. The ∠PAQ so formed is 60°. 

In the applet below, the radius of arcs may be changed with the help of point P. Point B can be used to change the position of line n and see the construction of the angle in its different positions.

Thursday, September 26, 2019

कोण का समद्विभाजक (Bisector of a given angle)

दिए हुए कोण के समद्विभाजक की रचना
हमें एक कोण M दिया गया है । रूलर और परकार की मदद से हमें दिए गए कोण के समद्विभाजक की रचना करनी है। रचना के चरण इस प्रकार हैं :

चरण 1 – M को केन्द्र मानकर परकार की मदद से एक चाप बनाइए जो ∠M की भुजाओं को N और O बिन्दुओं पर काटता है।

चरण 2 – N को केन्द्र मानकर और NO लंबाई के आधे से अधिक त्रिज्या लेकर ∠M के अंदर एक चाप बनाए।

चरण 3 – O को केन्द्र मानकर चरण 2 की त्रिज्या लेकर ∠M के अंदर एक और चाप बनाइए जो चरण 2 के चाप को P बिन्दु पर काटता है।

चरण 4 – बिन्दु M और बिन्दु P को जोड़िए , MP , ∠M का समद्विभाजक है।

नीचे दिखाई गयी एपलेट में बिन्दु B या बिन्दु C की मदद से दिए गए ∠M के अलग अलग मापों के लिए समद्विभाजक की रचना देखी जा सकती है। रचना के चरणों को देखने के लिए स्लाईडर STEP की मदद ली जा सकती है।

Construction of Bisector a given angle
We are given an angle M. We need to construct the bisector of the angle M using ruler and compass. Following are the steps of construction:

Step 1 – Taking M as a center and suitable radius, draw an arc cutting the arm of ∠ M at points N and O.

Step 2 – With N as center and radius more than half the distance NO, draw an arc in the interior of the ∠M.

Step 3 – With O as center and radius of Step 2, draw another arc inside the ∠M to intersect the act of Step 2 at point P.

Step 4 – Joint MP, which is the bisector of ∠M.

In the applet shown below point B or point, C can be moved to see the bisector for different measures of ∠M. The steps of construction can be viewed with the help of slider STEP.

Wednesday, September 25, 2019

Copy a given angle of unknown measure

दिए हुए कोण के बराबर कोण बनाना
हमें एक कोण P दिया गया है जिसका माप ज्ञात नहीं है। रूलर और परकार की मदद से हमें दिए गए कोण के बराबर एक कोण की रचना करनी है। रचना के चरण इस प्रकार हैं :

चरण 1 – एक रेखा l खींचिए और उस पर कोई बिन्दु M लीजिए।

चरण 2 – परकार के नुकीले सिरे को बिन्दु P पर रखकर एक चाप बनाईये जो ∠ P की भुजाओं को बिन्दु Q और बिन्दु R पर काटता हो।

चरण 3 – परकार के फैलाव को बिना बदले , उसके नुकीले सिरे को बिन्दु M पर रख कर एक चाप बनाइए जो रेखा l को बिन्दु N पर काटे।

चरण 4 – परकार को लंबाई QR के बराबर खोल कर उसके नुकीले सिरे को N पर रखकर एक चाप खींचिए जो चरण 3 के चाप को बिन्दु O पर काटता है।

चरण 5 – बिन्दु M और बिन्दु O को जोड़ते हुए किरण MO बनाईए । इस प्रकार हमें ∠M प्राप्त होता है। ∠M की माप ∠P के बराबर है। अर्थात ∠NMO = ∠QPR

नीचे दी गयी एपलेट में बिन्दु B या बिन्दु C को माउस की मदद से खींचकर P के अलग-अलग मापों के लिए M की रचना को देखा जा सकता है। साथ ही स्लाईडर STEP की मदद से रचना के चरणों को घटते हुए भी देखा जा सकता है।

Copy an angle on unknown measure
We are given an angle P whose measure is not known to us. We need to construct a copy of the given angle with the help of the ruler and compass. Steps of construction are as follow:

Step 1 – Draw a line l and take a point M on it.

Step 2 – Place the metallic point of the compass at point P and cut an arc which intersects the arms of ∠ P at points Q and R.

Step 3 – Without changing the compass setting, put the metallic point at point M and cut an arc which cuts the line l at point N.

Step 4 – Open the compass equal to length QR and draw an arc with center at N. This arc cuts the arc of step 3 at point O.

Step 5 – Draw a ray by joining points M and O. This way we get ∠ M which is equal in measure to ∠ P. We say that ∠ NMO = ∠ QPR.

In the applet given below, drag points B or C to see the constructed angle M for different measures of ∠ P. The steps of construction can be viewed with the help of slider STEP.

Tuesday, September 24, 2019

Perpendicular Bisector of a Line Segment

रेखाखण्ड के लंब समद्विभाजक की रचना
इस रचना के लिए हमें किसी लंबाई का एक रेखाखण्ड दिया गया है। हमें रूलर और परकार की मदद से दिए गए रेखाखण्ड का लंब समद्विभाजक खींचना है। इस रचना के निम्नलिखित चरण हैं :

चरण 1 – किसी लंबाई का एक रेखाखण्ड PQ खींचें।

चरण 2 – P को केन्द्र मानकर , परकार की मदद से PQ लंबाई की आधे से अधिक लंबाई लेकर एक वृत्त बनाएं।

चरण 3 – Q को केन्द्र मानकर , चरण 2 की त्रिज्या लेकर , परकार की मदद से एक और वृत्त बनाएं जो पहले वृत्त को बिन्दु A और B पर प्रतिच्छेद करता है।

चरण 4 – बिन्दु A और बिन्दु B को जोड़ते हुए रेखाखण्ड AB बनाइये । यह रेखाखण्ड , PQ को N बिन्दु पर प्रतिच्छेद करता है।

चरण 5 - डिवाइडर की मदद से जाँचिए कि बिन्दु P व बिन्दु Q , N से बराबर दूरी पर हैं और कोण PNA व कोण QNA समकोण हैं। अत: AB , रेखाखण्ड PQ का लंब समद्विभाजक है।

नीचे दी गयी एपलेट में बिन्दु P या Q को माउस की मदद से खींचकर अलग-अलग स्थितियों और PQ की अलग-अलग लंबाई के लिए रचना को देख सकते हैं। साथ ही स्लाईडर STEP की मदद से रचना के चरणों को घटते हुए भी देखा जा सकता है।

To construct the perpendicular bisector of a line segment
For this construction, we are given a line segment of some length. We need to construct its perpendicular bisector with the help of ruler and compass. This can be achieved in the following steps:

Step 1 – Draw a line segment PQ of some length.

Step 2 – With P as center and radius equal to more than half the length PQ, draw a circle with the help of a compass.

Step 3 – With Q as center and radius as in step 2, draw another circle which interest with the first circle at points A and B.

Step 4 – Join points A and B. This will intersect PQ at N.

Step 5 – With the help of divider, check that points P and Q are at equal distance from point N. Also, check the angles PNA and QNA are right angles. Thus, AB is the perpendicular bisector of given segment PQ.

The applet below shows the construction of perpendicular bisector. The points P and Q can be dragged with the help of the mouse to see the construction for different lengths of segment PQ. The steps of construction can be viewed with the help of slider STEP.

Monday, September 23, 2019

Perpendicular to a line through a point, not on it

एक दी हुई रेखा पर किसी बाहरी बिन्दु से लंब खींचना
इस रचना के लिए हमें एक रेखा l और एक बाहरी बिन्दु P दिया गया है। हमें रूलर और परकार की मदद से बिन्दु P से रेखा l से लंबवत एक रेखा की रचना करनी है।यह रचना निम्नलिखित चरणों में पूरी की जा सकती है:

चरण 1 – P को केंद्र मानकर एक सुविधाजनक त्रिज्या लेकर एक चाप इस प्रकार बनाईये जो रेखा l को दो बिन्दों L और M पर काटे।

चरण 2 – L और M को केन्द्र मानकर चरण 1 की त्रिज्या लेकर बिन्दु P के दूसरी ओर दो चाप बनाईये जो एक दूसरे को बिन्दु N पर काटें।

चरण 3 – N और P से होकर जाने वाली सरल रेखा m बनाईये । N और P से जाने वाली सरल रेखा m ही रेखा l पर लंब है। इसे m l लिखा जाता है।

नीचे दी गयी एपलेट में उपर लिखे तीन चरणों को पांच छोटे चरणों में दर्शाया गया है। माऊस की मदद से बिन्दु E या बिन्दु F को खींचकर त्रिज्या के अलग-अलग मानों के लिए रचना को देखा जा सकता है। स्लाइडर STEP की मदद से आप इस रचना के चरण देख सकते हैं। यह रचना बिन्दु C के सरल रेखा l के उपर रहने की स्थिति के लिए की गयी है , यदि बिन्दु C को रेखा के नीचे लाने का प्रयास किया जाता है तो यह रचना कार्य नहीं करेगी।

To construct a perpendicular to a line through a point, not on it
We are given a line l and a point P not on that line. We need to construct perpendicular to the given line through the given point. This can be achieved in the following steps :

Step 1 – Taking P as a center and suitable radius, cut an arc which intersects the given line l at L and M.

Step 2 - With L and M as centers and radius same as step 1, cut two arcs which intersect each other at point N.

Step 3 – Draw a line m through N and P. This line m is perpendicular to the given line l through point P. We write it as m l

In the applet below, the above three steps are demonstrated in five small steps. Points E or F may be dragged with the help of a mouse to see the construction for different arc radius. Use slider STEP to see different steps of the construction. Construction is valid for all the positions of point C above the given line l.

Sunday, September 22, 2019

Perpendicular to a line through a point on it

एक दी हुई रेखा पर स्थित एक बिन्दु से होकर लंब खींचना
इस रचना के लिए हमें एक रेखा l और उस पर स्थित कोई बिन्दु P दिया गया है। हमें रूलर और परकार की मदद से बिन्दु P पर रेखा l से लंबवत एक रेखा की रचना करनी है । यह रचना निम्नलिखित चरणों में पूरी की जा सकती है :

चरण 1 – P को केंद्र मानकर एक सुविधाजनक त्रिज्या लेकर एक चाप इस प्रकार बनाईये जो रेखा l को दो बिन्दों L और M पर काटे।

चरण 2 – L और M को केन्द्र मानकर LP से अधिक की त्रिज्या लेकर दो चाप बनाईये जो एक दूसरे को बिन्दु N पर काटें।

चरण 3 – N और P से होकर जाने वाली सरल रेखा m बनाईये । N और P से जाने वाली सरल रेखा m ही रेखा l पर लंब है। इसे ml लिखा जाता है।

नीचे दी गयी एपलेट में उपर लिखे 3 चरणों को 5 छोटे चरणों में दर्शाया गया है। माऊस की मदद से बिन्दु P और बिन्दु Q को खींचकर अलग-अलग स्थितियों में रचना को देखा जा सकता है। स्लाइडर STEP की मदद से आप इस रचना के चरण देख सकते हैं।

To construct a perpendicular to a line through a point on it
We are given a line l and a point P on that line. We need to construct perpendicular to the given line through the given point. This can be achieved in the following steps :

Step 1 – Taking P as a center and suitable radius, cut an arc which intersects the given line l at L and M.

Step 2 - With L and M as centers and radius more than LP, cut two arcs which intersect each other at point N.

Step 3 – Draw a line m through N and P. This line m is perpendicular to the given line l at point P. We write it as ml.

In the applet below, the three steps are demonstrated in five small steps. Points P and Q can be dragged with the help of the mouse to see the construction in different positions. Use slider STEP to see different steps of the construction.

Friday, September 20, 2019

Construction-Copy a given Line Segment

एक दिए हुए रेखाखंड के बराबर रेखाखंड की रचना करना
माना एक रेखाखंड LM दिया गया है , हमें रूलर और परकार की मदद से LM की लंबाई के बराबर PQ रेखाखंड की रचना करनी है। यह रचना निम्नलिखित चरणों में पूरी की जा सकती है :

चरण 1 – परकार के नुकीले सिरे को दिए गए रेखाखंड के बिन्दु L पर रखें और दूसरे छोर पर पेंसिल की नोंक को बिन्दु M तक ले जाएं। इस प्रकार परकार का फैलाव रेखाखंड LM की लंबाई को दर्शाता है।

चरण 2 – कोई रेखा l1 खींचिए, इस पर एक बिन्दु P लीजिए। चरण 1 के फैलाव में बिना कोई परिवर्तन किए हुए , नुकीले सिरे को P पर रखिए।

चरण 3 – दूसरे सिरे पर पेंसिल की मदद से एक चाप बनाईये (जोकि एक वृत्त का हिस्सा है) । माना यह चाप l1 को Q पर काटता है। इस प्रकार रेखाखंड PQ की लंबाई LM की लंबाई के बराबर है।

नीचे दी गयी एपलेट में दिए गए रेखाखंड LM की लंबाई को बिन्दु L या M की मदद से कम या ज्यादा कर उसका असर रचना की गयी रेखाखंड PQ की लंबाई पर देखा जा सकता है। स्लाइडर STEP की मदद से आप इस रचना के चरण देख सकते हैं।

Constructing a copy of a given line segment
Let a line segment LM be given, we need to construct a line segment PQ equal in length to the given segment LM with the help of ruler and compass. This can be done in the following steps:

Step 1 – Put the compass pointer on point L and take the pencil end to point M. The opening of the compass gives the length LM of the given line segment.

Step 2 – Draw any line l1 and take a point P on it. Without disturbing the opening of the compass in Step 1, put the compass pointer on P.

Step 3 – Draw an arc (which is a part of a circle) with the help of pencil at another end. Let this arc cut the line l1 at point Q. Now PQ is the copy of given line segment LM.

In the applet below, points L or M may be dragged to change the length of the given line segment LM and its effect on the length of constructed line segment PQ may be seen. Use slider STEP to see different steps of the construction.

Thursday, September 19, 2019

पूर्णांकों का गुणा (Integer Multiplication) - Part II

पूर्णांकों का गुणा
यह एपलेट हमें दो पूर्णांकों के गुणा को होते हुए देखने में मदद करती है।

एपलेट में सरणी दो पूर्णांकों के गुणा को प्रदर्शित कर रही है जिसमें सरणी की ऊंचाई एक गुणक और चौड़ाई दूसरे गुणक के बराबर है। किसी भी गुणक का मान बदलने के लिए एपलेट के काले बिन्दु का उपयोग किया जा सकता है।

इस एपलेट में कोई एक या दोनों गुणक ऋणात्मक हो सकते हैं , सरणी का रंग बताता है कि गुणनफल धनात्मक है या ऋणात्मक है। यदि दोनों गुणक धनात्मक हैं तो उनका गुणनफल धनात्मक होगा , यहां सरणी को नील रंग से दर्शाया गया है। यह पहले चतुर्थांश की स्थिति है। यदि गुणक विपरीत चिन्हों के हैं (एक धनात्मक और एक ऋणात्मक) , तो गुणनफल ऋणात्मक होगा , जिसे सरणी के लाल रंग से दर्शाया गया है। यह स्थिति दूसरे और चौथे चतुर्थांश में पायी जाती है। यदि दोनों ही गुणक ऋणात्मक हों तो गुणनफल धनात्मक होगा और यह तीसरे चतुर्थांश की स्थिति है। 
Multiplication of Integers
This virtual manipulative allows the user to visualize the product of two integers.

The array shows the product of two integers, with height equal to one factor and the width equal to the other factor. The colored array may be considered as groups in two ways (horizontal or vertical), as displayed in the text at the right, and the result of the multiplication is also shown. To change either of the factors, use the vertical and horizontal sliders, located inside the array.

Since this manipulative allows either (or both) of the factors to be negative, the color of the product shows whether the product is positive or negative. If both factors are positive, then, the product is positive (blue). If the factors have opposite signs (one positive and one negative), then the product appears as negative (red) in either the second or fourth quadrant, but if both factors are negative, then the product, in the third quadrant, is positive.

Wednesday, September 18, 2019

पूर्णांकों का गुणा (Integer Multiplication) - Part I

पूर्णांकों का गुणा
पिछले एक पोस्ट में हम लोगों ने पूर्णांक संख्याओं , पूर्णांक संख्याओं के समुच्चय , धनात्मक , ऋणात्मक और ऋणेत्तर पूर्णांक संख्याओं के बारे में चर्चा की थी। इस पोस्ट में हम संख्या रेखा की मदद से दो पूर्णांक संख्याओं के गुणा पर बातचीत करेंगे। पूर्णांक संख्याओं के गुणा हेतु निम्नलिखित निमय लागू होते हैं :

  • दो धनात्मक पूर्णांक संख्याओं का गुणा हमेशा धनात्मक होता है।
  • दो ऋणात्मक पूर्णांक संख्याओं का गुणा हमेशा धनात्मक होता है।
  • एक धनात्मक पूर्णांक संख्या और एक ऋणात्मक पूर्णांक संख्या का गुणा हमेशा ऋणात्मक होता है।

उपरोक्त नियमों को ध्यान में रखते हुए पूर्णांकों के गुणा को संख्या रेखा पर दर्शाया जा सकता है। इसके लिए संख्या रेखा पर समान लंबाई की कूद का उपयोग करना होता है जो कि बच्चों के द्वारा पुर्व में उपयोग की गयी छोड़ कर गिनना रणनीति को दर्शाता है। उदाहरण के लिए , संख्या रेखा का उपयोग 4 x 3 की गणना के लिए किया जा सकता है।
 अनुभव के बढ़ने के साथ – साथ बच्चे खुली संख्या रेखा का उपयोग करना शुरू कर देते हैं , इस प्रकार की संख्या रेखा पर समस्या से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण संख्याएं ही लिखी होती हैं। नीचे संख्या रेखा पर 4 x 14 दर्शाया गया है।
उपरोक्त उल्लेखित मॉडल को नीचे एक एपलेट के माध्यम से प्रदर्शित करने का प्रयास किया गया है। इसमें स्लाईडर्स की मदद से -5 और +5 के बीच के गुणन व्यंजक बनाए जा सकते हैं।

Multiplication of Integers
We have discussed integers in one of our previous posts. We discussed integer number set, positive, negative and non-negative integers. In this post, we will be discussing multiplication of two integers using the number line. The following rules are applied for multiplication involving integers:

  • The multiplication of two positive integers is always positive
  • The multiplication of two negative integers is always positive
  • The multiplication to one positive and one negative integer is always negative

Keeping in mind the above rules, we can model integer multiplication on a number line. Jumps of equal length on a number line reflect skip counting – a strategy that students use in early stages of multiplying. For example, a number line might be used to compute 4 × 3.
Later, students can use open number lines (number lines on which only significant numbers are indicated) to show multiplication with larger numbers. The following number line shows 4×14.
The applet below model the above concept. The sliders can be used to create different sets of multiplication expressions between -5 and +5.

Tuesday, September 17, 2019

गुणा का क्षेत्रफल मॉडल (Area Model of Multiplication)

गुणा
गुणा की अवधारणा की समझ बच्चे की गणितीय सोच में एक महत्वपूर्ण विकास को दर्शाता है। इस समझ के साथ बच्चे यह पहचानने लगते हैं कि समान मात्रा के समूहों को मिलाकर किस प्रकार एक पूरी मात्रा निकाली जा सकती है। प्रारंभिक कक्षाओं में गुणा की अवधारणा की मजबूत समझ ,भाग की अवधारणा और बीजगणितीय सोच के विकास की बुनियाद का काम करती है।

प्रारंभिक कक्षाओं में बच्चे समान मात्रा के समूहों को मिलाकर गुणा के अर्थ को समझने का प्रयास करते हैं। समझने के शुरूवाती दौर में गुणा करने की स्थिति का सामना करने पर बच्चे वस्तुओं को एक-एक कर गिनते हैं और परिणाम तक पहुंचते हैं। उदाहरण के लिए , बच्चे काउंटर्स या कंकड़ों का उपयोग कर चार वस्तुओं के तीन समूहों को दर्शाने की समस्या को प्रदर्शित कर सभी काउंटर्स / कंकड़ों को गिनकर वस्तुओं की कुल संख्या निकाल सकते हैं। 

अनुभव के बढ़ने के साथ-साथ बच्चे गिनती और तर्क करने की अन्य रणनीतियां का उपयोग करना सीखते हैं। इनमें प्रमुख हैं छोड़ कर गिनना , पहचाने जोड़ के तथ्यों का उपयोग करना (जैसे 6 वस्तुओं के 3 समूह के लिए : 6 में 6 जोड़ने से 12 और 6 मिलने पर 18 होता है)। आगे की अवस्थाओं में बच्चे गुणन तथ्यों की रणनीतियां सीखकर कुशलतापूर्वक उनका उपयोग करते हैं।

एक सरणी (Array) [वस्तुओं की पंक्ति और स्तंभ के रूप में व्यवस्था] गुणा का उपयोगी मॉडल प्रस्तुत करती है। सरणी में हर पंक्ति में वस्तुओं की संख्या , गुणन व्यंजक में गुणा की जाने वाली एक संख्या को निरूपित करती है जबकि स्तंभों की संख्या दूसरी संख्या को निरूपित करती है। सरणी से वस्तुओं को हटा कर उस स्थान को इकाई या 1 x 1 के वर्ग से निरूपित करने पर गुणा का क्षेत्रफल मॉडल बन जाता है। इसके द्वारा 3 x 4 को नीचे दर्शाया गया है।
नीचे दिखायी गयी जियोजेब्रा एपलेट क्षेत्रफल मॉडल को दर्शा रही है। नीले और लाल स्लाईडर की मदद से अलग-अलग संख्याएं बनाएं और वर्गों की कुल संख्या दोनों गिनकर दोनों संख्याओं के गुणनफल निकालें।

Multiplication 
The development of multiplication concepts represents significant growth in students’ mathematical thinking. With an understanding of multiplication, students recognize how groups of equal size can be combined to form a whole quantity. Developing a strong understanding of multiplication concepts in the early classes builds a foundation for comprehending division concepts and algebraic thinking.

In the primary grades, students explore the meaning of multiplication by combining groups of equal size. Initially, students count objects one by one to determine the product in a multiplication situation. For example, students might use counters/pebbles to represent a problem involving three groups of four, and then count each counter/pebble to determine the total number.
With experience, students learn to use more sophisticated counting and reasoning strategies, such as using skip counting and using known addition facts (e.g., for 3 groups of 6: 6 plus 6 is 12, and 6 more is 18). Later, students develop strategies for learning basic multiplication facts and use these facts to perform multiplication computations efficiently.

An array (an arrangement of objects in rows and columns) provides a useful model for multiplication. In an array, the number of items in each row represents one of the factors in the multiplication expression, while the number of columns represents the other factor. Replacing objects in an array by unit or 1 × 1 squares introduces the area model of multiplication. This is illustrated below for 3 × 4.
The GeoGebra applet below shows the area model of multiplication. Use the blue and red sliders to create different numbers and count the total number of squares to get the result of the multiplication of two numbers.

Monday, September 16, 2019

संख्या रेखा पर घटाना (Subtraction on Number Line)

इस पोस्ट के माध्यम से संख्या रेखा पर पूर्णांक संख्याओं के घटाने की प्रक्रिया को दर्शाने का प्रयास किया गया है। संबंधित मुख्य अवधारणाएं इस प्रकार हैं :
  • संख्या 0 , 1 , -1 , 2 , -2 , 3 , -3 , ………… का संग्रह पूर्णांक कहलाता है।
  • संख्या +1 , + 2 , + 3 , ………… धनात्मक पूर्णांक कहे जाते हैं।
  • संख्या -1 , -2 , -3 , ………….. ऋणात्मक पूर्णांक कहे जाते हैं।
  • संख्या 0 , +1 , +2 , +3 , ………….. ऋणेत्तर (non-negative) पूर्णांक कहलाते हैं।
  • पूर्णांकों को सरल रेखा पर निम्नलिखित प्रकार से निरूपित किया जाता है ।
  • दो पूर्णांक जिनका योग शून्य हो , एक – दूसरे के योज्य प्रतिलोम कहलाते हैं। ये एक दूसरे के ऋणात्मक भी कहलाते हैं।
  • किसी पूर्णांक का योज्य प्रतिलोम उस पूर्णांक का चिन्ह बदल कर प्राप्त किया जाता है।
  • एक दिए हुए पूर्णांक में से किसी पूर्णांक को घटाने के लिए , हम दिए हुए पूर्णांक में से उस पूर्णांक का योज्य प्रतिलोम जोड़ देते हैं।
This post deals with the subtraction of integers on the number line. The related concepts are as follows :
  • The collection of numbers 0 , 1 , -1 , 2 , -2 , 3 , -3 , ………… is called integers.
  • The numbers +1 , + 2 , + 3 , ………… are referred to as positive integers.
  • The numbers - 1 , - 2 , - 3 , ………….. are referred to as negative integers.
  • The numbers 0 , +1 , +2 , +3 , ………….. are referred to as non-negative integers.
  • The integers are represented on the number line as follows :
  • Two integers whose sum is zero are called additive inverses of each other. They are also called the negatives of each other.
  • Additive inverse of an integer is obtained by changing the sign of the integer.
  • To subtract an integer from a given number, we add the additive inverse of the integer to the given integer.

Sunday, September 15, 2019

संख्या रेखा पर जोड़ (Addition on Number Line)

आपने कई प्राथमिक कक्षाओं में संख्या रेखा को ब्लैकबोर्ड पर बना देखा होगा , कई बच्चे अपने बैठने की जगह पर ही इसे बनाकर रखते हैं। आज शिक्षकों के पास गणित के प्रतिरूपण (modeling) के कई विकल्प हैं , फिर भी संख्या रेखा एक महत्वपूर्ण और उपयोगी गणितीय उपकरण है। जहाँ अन्य सामग्रियां जैसे कंकड़ , तीलियां , क्यूब आदि संख्याओं को दर्शाते हुए सीखने में मदद करते हैं , वहीं संख्या रेखा बच्चों के लिए संख्याओं के बीच के संबंधों को समझने का एक अलग नजरिया प्रस्तुत करती है। प्रारंभिक कक्षओं में संख्या रेखा के उपयोग से अवधारणाओं को समझना बच्चों के लिए चुनौतीपूर्ण होता है , फिर भी इसका उपयोग करना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह आगे के कौशलों जैसे ऋणात्मक संख्याएं , दशमलव , भिन्न , ग्राफ आदि सीखने में मदद करती है जो उपर लिखी अन्य सामग्रियों की मदद से सीखी नहीं जा सकती हैं। संख्या रेखा बच्चों को मूर्त से अमूर्त सोच की ओर ले जाती है , यह बच्चों में बीजगणितीय सोच विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

गणित में संख्या रेखा को एक ऐसी रेखा के रूप में परिभाषित किया जा सकता है जिस पर बराबर अंतराल में संख्याएं लिखी होती हैं। इसे प्राय: क्षैतिज (horizontal) रखा जाता है और दोनों दिशाओं में अनंत तक बढ़ाया जा सकता है।


बच्चे जब संख्या रेखा की आधारभूत अवधारणाओं (संख्याओं को पहचानना , किसी संख्या तक पहुंचना आदि) से परिचित हो जाएं तो , संख्या रेखा की मदद से जोड़ना इन अवधारणाओं की समझ को सुदृढ़ करने में मदद करता है ।

You must have seen a number line on the blackboard in early primary classrooms, many children also draw it near their sitting area. Although teachers today have many options for modeling mathematics, the number line is still an important and useful math tool. While cubes and other manipulatives support learning by representing numbers, the number line actually develops learning by giving students another look at number relationships. Early primary students may find using a number line more challenging for some concepts. However, it’s important to stick with it as number lines provide learning opportunities for later skills that can’t be replicated with cubes, such as negative numbers, decimals, and graphing. The visual support that the number line provides helps young learners grow from concrete to abstract to algebraic thinking.

In math, a number line can be defined as a straight line with numbers placed at equal intervals. A number line can be extended infinitely in any direction and is usually represented horizontally.

Another great opportunity for exploring a number line is when learning the first steps of addiction. When the students are familiar with basic concepts of the number line (identification of numbers, to reach a number on the number line, etc.), the addition using number line helps in reinforcing the concepts.

Saturday, September 14, 2019

त्रिभुज का बहिष्कोण (Exterior Angle of a Triangle)

त्रिभुज का बहिष्कोण
त्रिभुज ABC की भुजा BC को D तक बढ़ाने पर त्रिभुज का बहिष्कोण ∠ACD प्राप्त होता है।

चित्र से स्पष्ट है कि,∠3 और ∠4 रैखिक युग्म बना रहे हैं,अत: हम लिख सकते हैं :
                                           ∠3+∠4=180° …..(1)
हम जानते हैं कि त्रिभुज के तीनों अंत:कोणों का योग 180° होता है , अत:
                                   ∠1+∠2+∠3= 180° …..(2)
समीकरण (1) व (2) से
                                   ∠1+∠2+∠3= ∠3+∠4
या                                      ∠1+∠2= ∠4

परिणाम : यदि किसी त्रिभुज की एक भुजा बढ़ाई जाए , तो इस प्रकार बना बहिष्कोण दोनों अंत: विपरीत कोणों के योग के बराबर होता है। यहां यह भी स्पष्ट होता है कि किसी त्रिभुज का बहिष्कोण अपने दोनों अंत: विपरीत कोणों में से प्रत्येक से बड़ा होता है।
Exterior Angle of a Triangle
By extending the side BC of a triangle ABC , we get exterior angle ∠ACD of the triangle.
It is clear from the figure that ∠3 and ∠4 form a linear pair , so we can write that :
                                     ∠3+∠4=180° …..(1)
We know that , the sum of interior angles of a triangle is 180° , so
                              ∠1+∠2+∠3= 180° …..(2)
From equations (1) and (2)
                              ∠1+∠2+∠3= ∠3+∠4
Or                                ∠1+∠2= ∠4

Result: If we extend one side of a triangle, then the exterior angle so formed is equal to the sum of two interior opposite angles. It is clear from the above that the exterior angle of a triangle is greater than the corresponding two interior opposite angles.

Friday, September 13, 2019

त्रिभुज के अंत:कोणों का योग(Internal Angle Sum of a Triangle)

त्रिभुज के अंत:कोणों का योग
त्रिभुज ABC के अंत: कोण क्रमश: ∠1 , ∠2 और ∠3 हैं। (चित्र 1)



BC और PQ परस्पर समांतर रेखाएँ हैं और AB तथा AC तीर्यक रेखाएँ हैं।

भुजा BC के समांतर और शीर्ष A से गुजरने वाली एक रेखा PQ खींचें।



चित्र 2 से स्पष्ट है कि ∠4 और ∠2 तथा ∠3 और ∠5 एकांतर कोणों के युग्म हैं, अत: 

   

      

          ∠2 = ∠4 …. (1)
          ∠3 = ∠5 …. (2)

परन्तु , PAQ एक सरल रेखा है , अत:
      ∠4+∠1+∠5 = 180° …..(3)

समीकरण (3) में समीकरण (1) और समीकरण (2) से मान रखने पर
                  ∠1+∠2+∠3 = 180°
अत: , हम कह सकते हैं कि त्रिभुज के तीनों अंत:कोणों का योग 180° होता है।

Internal Angle Sum of a Triangle
∠1, ∠2 and ∠3 are internal angles of a triangle ABC. (Figure-1)
Draw a line PQ through point A parallel to side BC of the triangle.
Now, BC and PQ are parallel to each other,AB and AC are acting as transversals.
From figure-2, it is clear that ∠4,∠2 and ∠3,∠5 form pairs of alternate angles, so
∠2 = ∠4 …. (1)
∠3 = ∠5 …. (2)
PAQ is a straight line, so we can say that
∠4+∠1+∠5 = 180° …..(3)
By putting the values from equations (1) and (2) into equation (3), we get
∠1+∠2+∠3 = 180°
Thus, we can say that, the sum of the internal angles of a triangle is 180°.

Thursday, September 12, 2019

संपूरक कोण (Supplementary Angles)

संपूरक कोण
जब दो कोणों का योग 180° होता है , तब प्रत्येक कोण एक-दूसरे का संपूरक कोण कहलाता है। उदाहरण के लिए , 45° और 135° संपूरक कोण हैं। संपूरक कोण , आसन्न कोण हो भी सकते हैं और नहीं भी । जब संपूरक कोण , आसन्न कोण होते हैं , तब वे एक रैखिक युग्म बनाते हैं। सभी रैखिक युग्म , संपूरक होते हैं।

Supplementary Angles
When the sum of two angles is 180°, then each angle is supplementary angle to the other angle. For example, 45° and 135° angles are supplementary angles. The supplementary angles may or may not be adjacent. When supplementary angles are adjacent to each other, they also form a linear pair. Every linear pair of angles is supplementary.